क्षेत्र - दरभंगा (बिहार)
शीर्षक - आंसू
ये आंखे मुझसे पूछती है हजार बार,
बहती है क्यों ये आंसू बार बार!
जवाब में क्या दू उसको,
वो रो रो कर भी रुलाती है मुझको !
रोकना चाहूं मै लाख उसे,
पर न जाने पड़ी है मेरे पीछे कब से !
मै कहती हूं आंसू को ,
तुम भी सीख लो मुस्कुराना,
लेकिन कह देती है मुझसे,
तुम्ही ने सिखाया मुझे ,
रो रो कर आंखो से गिराना !
आंसू भी एक पीड़ा है ,
जो गिर कर आंखो को दर्द देती है !
एक बार में न सही ,
सौ सौ बार रोकर ,
चुप हो जाती है !
है किसी के पास गम के आंसू
तो है किसी के पास खुशी के आंसू !
न जाने इन आंखो में ,
कैसे कैसे हैं आंसू !
आंसू ! आंसू ! आंसू!
कुमारी आरती
दरभंगा, बिहार
बहुत सूंदर
ReplyDeleteवाह बहुत सुन्दर रचना
ReplyDeleteExcellent..
ReplyDeleteMond blowing
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