छत्तीसगढ़
नहीं तिरंगा झुकने देंगे,
मात्रा 16 14
नहीं तिरंगा झुकने देंगे, कसम यही हम खाते हैं।
बीज प्रेम के बढ़ने देंगे, संकल्प यही उठाते हैं।।
तन-मन जीवन अर्पण सारा, कण-कण धरती प्यारी है।
अपनी माटी अपनी भाषा, सबसे सुंदर न्यारी है।।
अरिदल को ना जीने देंगे, अजेय बिगुल बजाते हैं।
नहीं तिरंगा झुकने देंगे, कसम यही हम खाते हैं।।
"नरेंद्र "जी के जन्मदिन पर, उठो राष्ट्र पहचान बनो।
युवा क्रांति कर जागो वीर, नवयुग भारत गान बनो।।
कोई कुचाल न चलने देंगे, पुनि-पुनि आज बताते हैं।
नहीं तिरंगा झुकने देंगे, कसम यही हम कहते हैं।।
राम -कृष्ण की इस धरती पर,, माँ गंगा का आँचल है।
पिता हिमालय रक्षक सबके, सप्त नदी पावन जल है।।
मंगल,भगत ,विवेक बनेंगे, शपथयही दोहराते हैं।
नहीं तिरंगा झुकने देंगे, कसम यही हम खाते हैं।।
लिए तिरंगा हाथ बढाते,, देखो वीर हमारे हैं।
भारत माता के लाल सभी, मिलकर अब ललकारें हैं।।
काली छाँव न् पड़ने देंगे,अपना वतन सजाते हैं।
नहीं तिरंगा झुकने देंगे,कसम यही हम खाते हैं।।
स्वरचित ©®
अमिता,रवि दूबे
छत्तीसगढ़
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