शीर्षक - उपहार
राज्य - झंझारपुर ,मधुबनी, बिहार
उपहार
मैं पतंग तुम डोर प्रिय
तुम बिन गगन अछूता है।
तुम से बंधकर जीवन
व्योम उत्कर्ष छूता है।
तुम ही कथाकार हो इस
जीवन के आख्यान का
तुम्हे उपहार क्या दूं
इस प्रेम के श्रृंगार का।
दिवस लगे त्योहार सा
हर यामिनी मधुमास सी।
उर में तुम्हारी प्रीति
नित नित भरती आस सी।
तुल्य नहीं जग में कोई
अनुराग के परिणाम का।
तुम्हे उपहार क्या दूं
इस प्रेम के श्रृंगार का।
Indu kumari
Superb
ReplyDelete💐💐💐💐💐
Bahut sundar
ReplyDeleteBahut Sundar
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