शीर्षक- बेटियाँ
राज्य- मध्यप्रदेश
मेरा महका मन, गुलाब है।
देख रही हूं मै लाल लब है।
चहचहाती मै, परी, उडने को बेताब।
और यही पर रहता,पूरा है शबाब।
किस किस से क्या छुपाऊः
जमाने की पड ना जाए नजर।
हरी डाली की मै कली।
बिखरू ना मे सहेली।्
बस एक साजन.के द्वार जाना चाहती हूँ।
तन, मन यही छोड फिर सबसे बिदा लेती हूँ।
काश/संभाल कर मुझे यह जग रख ले।
मां, ममता बहन.बन मै भी इटःठला आऊ।
और पूरे विश्व को अपना घर ही मान पाऊ।
कौन.समझेगा ,मुझे, कौन मुझें जीवन देगा।
देवियो की भांति इस जगह पर रखेगा।
आज आप सभी से यही कहना चाह रही।
बेटियां तो परियां है, इनके पर ना काट़ो तुम।
इस संसार मे इन्हे भी जीने दो, आसमा ंतक जाने दो,
श्री मती ममता वैरागी तिरला धार
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