शिर्षक- " तब.......!सीखते है बच्चे........!"
पता-रमतरा ,गुरूर ,बालोद,
छत्तीसगढ
" तब ......! सीखते है बच्चे.....! "
बच्चे , जब आलोचनात्मक माहौल मिले,
निंदा करने का गुण आ ही जाता है ।।
बचपन मे बच्चे को अच्छा संस्कार मिल जाता है,
वही दुनिया मे अच्छा नाम कामाता है ।।
जो हमेशा भय के साये मे
पले - बढे,
वह चिंता, शंका से ग्रस्त हो जाता है ।।
जो बडो मे सहनशीलता
व उदारता देख ,
वह बडा होकर धैर्यवान बन जीता है ।।
जो बचपन से शाबाशी या प्रसंशा पाते ,
वह सराहना करना बाखुबी जान जाता है ।।
माँ की ममता पिता की प्यार से,
बच्चे मे स्नेह ,करूणा भाव आ जाता है ।।
परिवार मे व्देष की भावना हो
तो वह नन्हा सा बच्चा भी,
ईष्या करना सीख जाता है ।।
तब फिर चंचल मन परिपक्व हो जाता है,
और वह अपनी पूर्ण स्वरूप मे आता है ।।
- खुमान सिंह भाट -
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