Wednesday, January 29, 2020

छत्तीसगढ़ से अमिता रवि दूबे की रचना- खाकी

अमिता रवि दूबे छत्तीसगढ़
मेरी कविता मेरा ट्रेंड
खाकी, पुलिस,सेना, फौज वर्दी 
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  खाकी वर्दी पुलिस की, आन बान अरु शान।
 सतत कर्म धारण किए,  हो जाते कुर्बान।।

  वर्दी पहनी बेटियाँ, जाग उठा है देश।
चलती जब मैदान में, सुखद लगे परिवेश।।

 
देश ,धर्म संकल्प ले, भरती हुए जवान।
फौज,पुलिस बल सहित हैं, सेना के सम्मान।।
 
खाकी वर्दी से बढ़े  जन जीवन की शान।
सुख-शांति देते यही, करें तिरंगा गान।।

  सैनिक ,फौजी देश के, चलते सीना तान।
 बढ़ें  शान से चल रहे , मूँछ बढ़ाती  शान।।

बेटी फौजी बन गई, भारत की जयकार।
सेना की मुखिया बनी,भरती है हुंकार।।


  खाकी, सेना पुलिस  से, बढा देश का मान।
वर्दी धारी दे रहे,  निज हित का बलिदान।।

सैनिक ,फौजी वीर से, आज बचा है देश।
रक्षक बनकर हैं खड़े,पहन कर्म गणवेश।।

 वर्दी धारी जब कभी,  हुए देश में भ्र्ष्ट।
दुष्ट आचरण से हुआ, बहुत मानसिक कष्ट।।

लिए तिरंगा हाथ में, बाँध कफन   से शीश।
सूर-वीर सैनिक बने, जनता के जगदीश।।

 लोक प्रशासन  से जुड़े, चुस्त सभी ये अंग।
वर्दी धारी अरु पुलिस,भरते शक्ति भुजंग।।

स्वरचित
अमिता,रवि दूबे

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