Monday, January 13, 2020

राजस्थान से बजरंग दान चारण की रचना- स्वामी विवेकानंद

कवि का नाम   बजरंग दान चारण 
राज्य  राजस्थान
 निवासी - नाथूसर ,बीकानेर 
कविता का शीर्षक-   स्वामी विवेकानंद        

  युवा संत की अमृत वाणी  
सुनकर  सन्नाटा छाया था
धर्म ध्वजा ले हाथों में जब
विश्वबंधुत्व समझाया था 
भारत विश्व गुरु है माना 
चरणों में शीश झुकाया था 
जब हिंदुत्व का डंका
 सारे पश्चिम में बजवाया था 
शिकागो में विवेकानंद ने 
भारत का मान बढ़ाया था
 भारत माता का जग में 
जय जयकार  कराया था

बोले वसुधैव कुटुम्बकम
 हमारे मुल्क के संस्कार में
करतल ध्वनि रूकी नहीं थी 
शिकागो के सभागार में
मीलों पीछे सभा चल पड़ी
वशीकरण था उद्गार में 
पूरा पश्चिम फिदा हुआ हमारे
 विवेकानंद के प्यार में

हे युवाओं हनुमान तुम 
अपना पौरुष पहचानो
हे भारत के वीर जवानों 
 अपनी गौरव गाथा जानो
विवेकानंद के सपनों का 
भारत बनाना है तुमको
विश्व गुरु की पदवी फिर से 
हासिल करनी है तुमको

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