Thursday, January 9, 2020

छत्तीसगढ़ से शैलेन्द्र कुमार धिरहे"शैल" की रचना- अजन्मी बच्ची की ख्वाहिश

नाम:-शैलेन्द्र कुमार धिरहे"शैल"
राज्य:-छत्तीसगढ़
शीर्षक:-अजन्मी बच्ची की ख्वाहिश


अजन्मी बच्ची की ख्वाहिश
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तेरे कोख में पल रही 
मै बड़ी भाग्यशाली हूँ माँ।
खुशियों की होली हूँ तेरी
सुख समृद्धि की दिवाली हूँ माँ।

चाहत न होगी मुझे 
कभी तेरे धन दौलत की।
माँग न करुँगी कभी
सोने चाँदी कोई शौहरत की।

लड़कों से भी आगे 
बढ़ने की मुझमें ताकत है।
हार न मानूँगी कभी
यही दिल में बसी आदत है।

नाम रौशन करूँगी पूरे देश का
जीत का परचम लहराऊँगी।
देश के स्मृति पटल पर,स्वर्णिम
अक्षरों से नाम अपना लिखजाऊंगी।

उम्मीदों की उड़ान है प्रबल 
न कोई इसे हिला पायेगा।
दृढ़ संकल्पित रहूँगी सदा
विजय पताका लहरायेगा।

ख्वाहिश है यही मेरी तुम से माँ!
मुझे इस पवन धरती पर आने दे।
एक मौका देकर कृपा कर,
तेरे साथ मातृभूमि का कर्ज चुकाने दे।।

             ----शैलेन्द्र कुमार धिरहे"शैल"
             

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