जिला- पटना
राज्य -बिहार
संघर्षों की छलांग
एक परिंदा ऐसा देखा,
फिर उड़ता फिर बैठ जाता।
दुनिया के हर बाधाओं से,
लड़ता लड़ता थक जाता।
ज्यों बढ़ाता कदम मंजिल की ओर,
त्यों जग खींचे पिछे की ओर।
होती जो हल्की ऊंची उड़ान,
देखकर हो जाते सब परेशान।
मेहनत करने वालो को,
नही कभी हार है मिलती,
ऐसा उसने ज्ञान लिया।
अपनी सारी सामर्थ्य शक्ति को,
अच्छे से पहचान लिया।
छूनी है आसमान को अब तो,
ऐसा उसने ठान लिया।
आखिर में मिली सफलता,
दुनिया ने भी उसे मान लिया।
संघर्षों से वो बन गया मिशाल,
चूमने लगी दुनिया उसके कदमताल।
Bharte rho tum v choti choti....uran
ReplyDeleteHer jawa pe hoga eak din nam diwan
Very good
ReplyDeleteBhut achchha likhte ho aap
Super...lage rho veer
ReplyDeleteबहुत अच्छा.
ReplyDeleteJio mere dost yese hi apne gaw our pita ji our dada ji ka name roushan Karo 👌👌👌👍👍👍👍👍👍
ReplyDeleteImpressing thought
ReplyDeleteबिहार की धरती से तुम भी एक दिन महान कवि बन जाओगे अपनी उड़ान बनाये रहो।
ReplyDeleteएक दिन तुम्हारा भी नाम किताब में आएगा "दीवान"।
Jiyo
ReplyDeletevery inspirational poem
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