राज्य-छत्तीसगढ़
विधा-कुण्डिलया छंद
विषय-विश्व हिंदी दिवस
1-हिन्दी
हिन्दी हिन्दुस्तान की, हृदय समाहित प्राण।
विश्व हितैषी भाष यह, हितकर सबकी त्राण।
हितकर सबकी त्राण, नागरी लिपि हिय भाती।
हमाहमी से दूर, भाव सम वक्ष बहाती।
कहे अमित कविराज, भारती की यह बिन्दी।
हर्षित हिन्द विशेष, हितावह हीरक हिन्दी।
2-हिन्दी भाषा
भाषा भारत वर्ष की, हिन्दी इसकी भाष।
मेल कराती एक यह,भारतीय अहसास।
भारतीय अहसास, हृदय को सबकी भाती।
कहनी सुननी बात, सार झट यह समझाती।
कहे अमित कविराज, पूर्ण करती अभिलाषा।
संप्रेषण साकार, देशहित हिन्दी भाषा।
3-हिन्दी भाषा
समता समुचित सादगी, समचर सद् समवेत।
समीकरण सम्मति सहित, संविधान समुपेत।
संविधान समुपेत, समाहित सबकी आशा।
संरक्षक संस्कार, सभोचित हिन्दी भाषा।
कहे अमित कविराज, सबल है इसकी क्षमता।
मनोनीत यह भाष, समर्पित समुदित समता।
*कन्हैया साहू 'अमित'*
भाटापारा छत्तीसगढ़
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