Tuesday, December 31, 2019

बिहार से प्रेरणा कर्ण की कविता- नया सवेरा

नाम - प्रेरणा कर्ण
पता - दरभंगा, बिहार 
विधा - कविता
शीर्षक - नया सवेरा ।

मुड़कर जब देखता हूँ पीछे मैं, 
जानें कितने लोग पीछे छूट गये, 
कितनी गलियां पीछे छूट गयीं, 
कितनी सड़कें नजरों से गुजर गयी ।

जब देखा मुड़कर पीछे मैंने, 
जानें कितने घर छूट गये ।
जिन गलियों में बीता बचपन अपना, 
आज बेगाने से लगने लगे ।

खेला था संग सबके जिस आँगन में,
आज बहुत वो याद आने लगे ।
दिल करता है, फिर चली जाऊँ, आज उन्हीं राहों पर, 
सीखा था मैंने जहाँ पर चलना, दादाजी का हाथ पकड़कर ।

सबसे मिलूँ मैं, गले लगाऊँ, 
जो कुछ भूला-बिसरा था मैं, 
कान पकड़कर माफी माँगू, 
नई सुबह के साथ मैं, नया सवेरा जीवन में लाऊँ ।
सबके साथ मिलजुलकर हर्षोल्लास की लहर फैलाऊँ ।
©प्रेरणा कर्ण, दरभंगा, बिहार

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