राज्य: असम
शीर्षक: वतन की शान
वतन की शान
करूँ पूजा करूँ वंदन,
करूँ मैं प्रार्थना तेरी ।
जनम इस देश में ही लूं,
रहे तू माँ सदा मेरी ।
करूँ मैं शीश न्यौछावर,
वतन की शान में हरदम ।
वतन की मैं सदा सेवा,
करूँ जब तक रहे माँ दम ।
नहीं हिन्दू नहीं मुस्लिम,
नहीं कोई धरम मेरा ।
वतन में प्रीत फैलाएं,
यही बस है करम मेरा ।
करूँ अल्लाह मैं सजदा,
भजो तू राम औ सीता ।
पढ़ूँ मैं भी कुरां मन से,
चलो तुम भी पढ़ो गीता ।
बहे अब प्यार की गंगा,
वतन में ईद होली में ।
रहे मिल के सभी हरदम,
बसे हो प्यार बोली में ।
- विनय कुमार, न्यू बंगाईगांव (असम),
AAP Desh ki San hai
ReplyDeleteइस ज़र्रानवाज़ी के लिए आभार भाई
DeleteAapki Kavita se Desh ki akta me char cand lag gaya
ReplyDeleteधन्यवाद आपका । देश मे सद्भाव हो यही मेरी चाहत है ।
Deleteअति सुंदर अनेकताओं में एकता यही हमारे देश की पहचान है
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद भाई
Deleteबहुत सुंदर सर आप ने देश के एकता और अखंडता पर प्रकाश डालें है, धन्यबाद सर जय हिंद
ReplyDeleteबहुत सुंदर सर आप ने देश के एकता और अखंडता पर प्रकाश डालें है, धन्यबाद सर जय हिंद
ReplyDeleteदिल की असीम गहराइयों से आभार
DeleteNice poem
ReplyDeleteVery nice poem ......sir...💐💐💐
ReplyDeleteThank u
Deleteअति सुंदर देशभक्ति से ओतप्रोत कविता
ReplyDeleteनितेश कुमार कनिय अभियंता / डिब्रूगढ़ कारखाना
Messenger of peace....sir
ReplyDeleteThank you dear
DeleteSuperb sir ekta ke Pratik dekh kar man prafullit ho gaya 🙏🙏🙏🙏🙏🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद
DeleteSuperb sir ekta ke Pratik dekh kar man prafullit ho gaya 🙏🙏🙏🙏🙏🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
ReplyDeleteदेश मे एका रहे
Deleteधन्यवाद आपका । देश मे सद्भाव हो यही मेरी चाहत है ।
ReplyDeleteजय हिंद
Deleteसरहनीय🙏🙏🙏
ReplyDeleteहृदयतल से आभार आदरणीय
DeleteI really like this poem, its simplicity contains great thought. (DEAR SIR JI) You r such a amazing Person In this Earth.WITH GREAT THOUGHTS.
ReplyDeleteShubham Batham
इस स्नेह सींचन के लिए आभारी हूँ
Deleteबहुत ही शानदार रचना हैं सर... कोटि कोटि धन्यवाद आपको...गिरिधर नागर
ReplyDeleteधन्यवाद आपका
DeleteSir .... VERY NICE POEM...🇳🇪🇳🇪🇳🇪🇳🇪
ReplyDeleteThank you so much
DeleteNice sir
ReplyDeleteThank you
DeleteANGAD KUMAR...
ReplyDeleteSUPP
Thnks
Deleteदेश के नाम शानदार संदेश।
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय
Deleteदिल की असीम गहराइयों से आपका आभार
ReplyDeleteVery nice poem, Sir
ReplyDeleteThnks
Deleteसर आपकी यह रचना नयी पीढ़ी के लिए बहुत ही प्रेरणा दायक है
ReplyDeleteधन्यवाद भाई
DeleteWonderful. Thanks for the inspiration
ReplyDeleteThank u so much
Deleteहर वक़्त मेरी आँखों में धरती का स्वप्न हो ,
ReplyDeleteजब कभी मरू तो तिरंगा मेरा कफ़न हो ,
और कोई ख्वाहिश नहीं है ज़िन्दगी में ,
जब कभी भी जन्मु तो भारत मेरा वतन हो ..!!
ऐ खुदा ऐसा हमको वतन चाहिये,
Deleteभाईचारे से हमको अमन चाहिये।
गर विनय मरे तो वतन पे मरे
और तिरंगे का हमको कफ़न चाहिये।।
धन्यवाद सर बहुत अच्छी कविता है।
ReplyDeleteआभार भाई
DeleteVery nice poet
ReplyDeleteNice sir
ReplyDeleteThanks a lot
DeleteAapko mere tarph se dhero sari subhkamnay sir jee.aise hi humlog ka margdarshan karte rahen sir.
ReplyDeleteMeri rachna ko pasand karne ke liye Dhanyvad.
Deleteबहुत ही सुन्दर एवं अनमोल रचना है सर्।
ReplyDeleteआभारी हूँ आपका
Deleteआप एक किताब लिखीये।
ReplyDeleteआप सब की दुआ रहेगी तो यह काम भी मैं जल्द ही सम्पन्न कर लूंगा।
DeleteVery beautiful & meaningful poem
ReplyDeleteThank you so much dear
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