Monday, December 9, 2019

असम से विनय कुमार की रचना- वतन की शान

नाम: विनय कुमार
राज्य: असम
शीर्षक: वतन की शान

वतन की शान

करूँ पूजा करूँ वंदन,
          करूँ मैं प्रार्थना तेरी ।
जनम इस देश में ही लूं,
          रहे तू माँ सदा मेरी ।

करूँ मैं शीश न्यौछावर,
          वतन की शान में हरदम ।
वतन की मैं सदा सेवा,
          करूँ जब तक रहे माँ दम ।

नहीं हिन्दू नहीं मुस्लिम,
          नहीं कोई धरम मेरा ।
वतन में प्रीत फैलाएं,
          यही बस है करम मेरा ।

करूँ अल्लाह मैं सजदा,
         भजो तू राम औ सीता ।      
पढ़ूँ मैं भी कुरां मन से,
         चलो तुम भी पढ़ो गीता ।

बहे अब प्यार की गंगा,
          वतन में ईद होली में ।
रहे मिल के सभी हरदम,
          बसे हो प्यार बोली में ।
        
           - विनय कुमार, न्यू बंगाईगांव (असम),

57 comments:

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    1. इस ज़र्रानवाज़ी के लिए आभार भाई

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  2. Aapki Kavita se Desh ki akta me char cand lag gaya

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    1. धन्यवाद आपका । देश मे सद्भाव हो यही मेरी चाहत है ।

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  3. अति सुंदर अनेकताओं में एकता यही हमारे देश की पहचान है

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  4. बहुत सुंदर सर आप ने देश के एकता और अखंडता पर प्रकाश डालें है, धन्यबाद सर जय हिंद

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  5. बहुत सुंदर सर आप ने देश के एकता और अखंडता पर प्रकाश डालें है, धन्यबाद सर जय हिंद

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    1. दिल की असीम गहराइयों से आभार

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  6. अति सुंदर देशभक्ति से ओतप्रोत कविता
    नितेश कुमार कनिय अभियंता / डिब्रूगढ़ कारखाना

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  7. Superb sir ekta ke Pratik dekh kar man prafullit ho gaya 🙏🙏🙏🙏🙏🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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  8. Superb sir ekta ke Pratik dekh kar man prafullit ho gaya 🙏🙏🙏🙏🙏🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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  9. धन्यवाद आपका । देश मे सद्भाव हो यही मेरी चाहत है ।

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  10. I really like this poem, its simplicity contains great thought. (DEAR SIR JI) You r such a amazing Person In this Earth.WITH GREAT THOUGHTS.


    Shubham Batham

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    1. इस स्नेह सींचन के लिए आभारी हूँ

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  11. बहुत ही शानदार रचना हैं सर... कोटि कोटि धन्यवाद आपको...गिरिधर नागर

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  12. Sir .... VERY NICE POEM...🇳🇪🇳🇪🇳🇪🇳🇪

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  13. देश के नाम शानदार संदेश।

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  14. दिल की असीम गहराइयों से आपका आभार

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  15. सर आपकी यह रचना नयी पीढ़ी के लिए बहुत ही प्रेरणा दायक है

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  16. Wonderful. Thanks for the inspiration

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  17. हर वक़्त मेरी आँखों में धरती का स्वप्न हो ,

    जब कभी मरू तो तिरंगा मेरा कफ़न हो ,

    और कोई ख्वाहिश नहीं है ज़िन्दगी में ,

    जब कभी भी जन्मु तो भारत मेरा वतन हो ..!!

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    1. ऐ खुदा ऐसा हमको वतन चाहिये,
      भाईचारे से हमको अमन चाहिये।
      गर विनय मरे तो वतन पे मरे
      और तिरंगे का हमको कफ़न चाहिये।।

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  18. धन्यवाद सर बहुत अच्छी कविता है।

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  19. Aapko mere tarph se dhero sari subhkamnay sir jee.aise hi humlog ka margdarshan karte rahen sir.

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  20. बहुत ही सुन्दर एवं अनमोल रचना है सर्।

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  21. आप एक किताब लिखीये।

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    1. आप सब की दुआ रहेगी तो यह काम भी मैं जल्द ही सम्पन्न कर लूंगा।

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  22. Very beautiful & meaningful poem

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