शीर्षक-नव ऋतु
राज्य-छत्तीसगढ़
हेमन्त ऋतु के आगमन का
स्वागत करते प्रवासी पक्षी
झांक रहे कब हो सूर्योदय
ठिठुरन भरी शीत बरसाते।
सूरज पहाड़ी के पीछे अलसाये
कोहरे का वो जाल हटाते।
छुई-मुई सी दुबकी घासें
शबनम की बूंदें उन्हें जगाये।
कलियां पूछ रही हैं तरु से
इतने मोती कहां से लाये।।
शीत लहर से मुंह धो -धो कर
रात रानी यूं ही इतराये,
पत्तों के झुरमुट में तितली
फूलों से अठखेलियां कर जाये।
भौंरे कर रहे हैं गुंजन,
पीहू -पीहू पपीहा दुहराये।
नीला आसमां चुनरी ओढ़े,
धरती का है मन हरषाये।
आओ हम भी करें स्वागत
नव ऋतु सबके मन को भाये।।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर
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