श्रीमाधोपुर ,राजस्थान
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शीर्षक :-कवि हूँ मैं
कवि हूँ मैं ह्रदय से कर सृजन नव गीत गाता हूँ ।
कलम झुकने नहीं पाए फर्ज अपना निभाता हूँ । ।
व्यथा और मर्म की स्याहीं से लिखता हूँ मैं हर रचना
मनुजता खो गई अपनी उसे ख़ुद में जगाता हूँ ।।
कवि हूँ मैं .....
मद कभी टिक नहीं सकता राज का और यौवन का ।
वक़्त का आईना बनकर शक़्ल सबको दिखाता हूँ ।।
कवि हूँ ...........
चांद मिलता नहीं सबको गहरी इस रात में देखों ।
अंधेरा हरने को उनका एक दीपक जलाता हूँ ।।
कवि हूँ ...........
भटक जाए मुसाफिर जो कभी मंजिल की राहों में ।
मील का पत्थर बनकर बस उन्हें रास्ता दिखाता हूँ ।।
कवि हूँ .........
लूटती माँ बहन की इज्जत पर मुँह फेरने वालों ।
आगे नम्बर तुम्हारा है मैं कड़ुआ सच सुनाता हूँ ।।
कवि हूँ .......
कुमार तनसुख
उत्तम सृजन
ReplyDelete��
ReplyDeletevery nice. .
ReplyDeleteशानदार
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteबहुत सुंदर भाईसाब
ReplyDeleteमनुजता खो गई अपनी उसे खुद मैं जगाता हूं..
ReplyDeleteVery nice
Very good
ReplyDeleteवाह जी वाह
ReplyDeleteजगाते रहो
ReplyDeleteवाह वाह क्या बात है। उतम रचना
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