मूल निवास- रुद्रप्रयाग उत्तराखंड
वर्तमान- पपुआ न्यू गिनी
एक वरदान मेरी परी के लिए
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मेरी नन्ही परी प्यारी सी
मुझे जीने का एक हौसला देती
मै हैरान हूं कि
वह हर समय खुश रहती है
मुझे खुशी का घोंसला देती।
ऊपर वाले ने मशक्कत से
बनाया, सौंप दिया मुझे
बिना जप तप किए ही
वरदान दे दिया मुझे।
अब मैं
उसी भगवान को, लक्ष्मी को
रोज देखता हूं
अपनी नन्ही परी में।
मै एक पिता हूं परी का
पिता का डर
छुपा नहीं है बैरी समाज से।
फिर
एक वरदान अब मांगता
कि मेरी परी को भी दुर्गा बनाना
दुर्गा!!!
-संदीप सिंधवाल संजू
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