राज्य - छत्तीसगढ़ ( बालोद )
शीर्षक - " क्या होगा "
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मैं सोचता हूं कि क्या होगा,
क्या हर सवेरा नया होगा ?
जिंदगी तो सभी जीते हैं जनाब ,
सोचता हूं जिंदगी जीने का अंदाज कब नया होगा ?
कब सोचेंगे लोग की एक साथ रहें,
जैसे भी हो साथ साथ रहें,
कब रात के झगड़ो को छोड़कर सो जाएंगे लोग ,
और कब बसंत रीतू का नया सवेरा होगा ,
सोचता हूं कि क्या होगा ,
क्या हर सवेरा नया होगा?
कब लोग मेरे तेरे को छोड़कर हमारे बारे में सोचेंगे ,
कब लोग घर्म को छोड़कर देश की सोचेंगे ,
कब सुख दुख में साथ देने लगेंगे लोग ,
कब मां बाप को सम्मान देने लगेंगे लोग,
क्या हमारी पीढ़ी का भविष्य सुनहरा होगा ?
सोचता हूं कि क्या होगा ,
क्या हर सवेरा नया होगा?
~ संजय कुमार
Nice libe
ReplyDeleteGjb
ReplyDeleteGjb
ReplyDeleteNice bro sanjay
ReplyDeleteImpressive I like it
ReplyDeleteBahut khub
ReplyDeleteSundar kavita
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteWell done
ReplyDeleteSundar
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