Monday, December 16, 2019

छत्तीसगढ़ से शैलेन्द्र कुमार मिश्र"शैलू" की रचना- बेटियाँ

कवि- शैलेन्द्र कुमार मिश्र"शैलू"
शीर्षक- बेटियाँ
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला- महासमुंद


माँ की लाडली,पिता की दुलारी होती है बेटियां।
घर के आँगन की फुलवारी होती है बेटियां।
कमजोर समझने की भूल मत करना इन्हें।
अपने पे आ जाए तो आग की चिंगारी होती है बेटियां।
विनम्रता की स्वरूप होती है बेटियां।
हजारों कष्ट सहकर भी चुप होती है बेटियां।
जो करता है इनका कभी भी  अपमान।
उनके लिए रानी लक्ष्मी का रूप  होती है बेटियां।
घर आती है लक्ष्मी साथ लाती है बेटियां।
सुख शांति समृद्धि और मान बढ़ाती है बेटियां।
फिर भी एक प्रश्न उठता है मन मे।
क्यों हर दिन कोख मे मारी जाती है बेटियां

शैलेन्द्र कुमार मिश्र"शैलू"

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