कवि - - बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
निवास - खंडेला जिला सीकर राजस्थान।
संपर्क - 8769764786
शीर्षक - - नारी पर अत्याचार कब तक?
वर्तमान भारत की समष्टि के इस
यक्ष प्रश्न का उत्तर कौन देगा?
क्या समष्टि के दिलों में भड़कती आग,
या गूंगे, बहरे, बेहया प्रशासन का मौन देगा?
नारी पर ये अत्याचार कब तक?
क्या सृष्टि भस्मीभूत न हो जब तक?
या प्रलयंकर के ताण्डव की प्रतीक्षा है?
या फिर भवानी के संयम की ले रहे परीक्षा है?
क्या इसकी कोई काल-सीमा है?
जिसने मनुजता का सुख-चैन छीना है।
रे नराधम! क्या तुझे सिर्फ शरीर दिखाई देता है?
दुःशासन की तरह द्रौपदी का चीर दिखाई देता है?
क्यों चीरहरण पर उतरा तू, एक बार सोच ले?
देख उसमें अक्स माँ-बहनों का, हाथ अपने रोक ले,
"वज्रघन" नहीं है नारी केवल भोग्या,
है वह वंदन, अभिनंदन के योग्या,
नारी भक्षणीय नहीं, रक्षणीय है यह जान ले,
साक्षात् चण्डी, काली, भवानी है तू जान ले।
बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
उत्तम सृजन
ReplyDeleteNice lines
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