कवि का नाम-डी राज सेठिया।
शीर्षक -पिता
स्थान-कोंडागांव छत्तीसगढ़
सम्पर्क सूत्र-8770278506
उंगली पकड़कर चलना, सिखाया है।
नन्ही हाथो को लिखना , सिखाया है।
मेरी पहली बोल की ,सिख पिता है।
मेरी ख्वाहिशो की ,कुंजी पिता है।1।
जब बीमार पड़ा मैं,उस रात जगा है।
मेरी सांसो को पढ़कर, तब ओ रोया है।
मेरी हर मर्ज की दवा पिता है।
मेरे हर सवाल का,जवाब पिता है।।2।।
कोई वैज्ञानिक नही बना पाया,ऐसा चक्र सुरक्षा है।
जो पिता के बाहों में महसूस होता है।
सजा और पश्चाताप की,अंतर्द्वंद्व पिता है।
मेरी हँसी देख ,सम्पूर्ण समर्पण पिता है।3।
मेरे जीवन के सूर्य की पहली किरण पिता है।
स्नेह और भय का,समावेश पिता है।
पैसा नही है फिर भी,धनकुबेर पिता है।
अपनी इच्छाओं को मारकर, मेरी जरूरत पिता है।4।
मेरे इस धरती के ईश्वर पिता है।
संयम,अनुशासन, प्रेम की सिख पिता है।
विपत्ति में धैर्य न छोड़ने की पराकाष्ठा पिता है।
"हा"मेरी जीवन की 'गौरवमयी पृष्ट' पिता है।5।।
डी राज सेठिया
Aati sunder kavita
ReplyDeleteVery nice👌👌👌👌👌
ReplyDeleteAwsom poetry
ReplyDeleteबेहतरीन एक एक शब्द दिल को छू जाने वाली है।
ReplyDeleteहमारे दर्द को जो कभी ना दिखाकर अंदर अंदर घुटते हैं वो पिता हैं
Bhut hi Sundar
ReplyDeleteउत्कृष्ट रचना.... पिता संरक्षक भी है और अच्छा मित्र भी...
ReplyDeleteUttam rachna
ReplyDeleteNice bro
ReplyDeleteBehtarin bhaiya ji
ReplyDeleteWah wah ...awesome bro
ReplyDeleteपिता के लिये जो आपने सम्मान दिया है।उसके लिए आपका आभार।।
ReplyDeleteअति सुंदर
ReplyDeleteAwesome
ReplyDeleteबहुत ही खूबसूरत पंक्ति है भाई
ReplyDeleteBahut Sundar Kavita hai
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