नाम- डॉ अलका कुमारी
राज्य- झारखंड ( रांची)
शीर्षक- गृहलक्ष्मी
संपर्क्,-
गृहलक्ष्मी
सृष्टि का आधार है नारी।
संस्कृति और सभ्यता
की पहचान है नारी।
है यह गृहस्वामिनी
गृहणी ,गृहलक्ष्मी।
घर की शोभा हैं गृहलक्ष्मी।
मकान तो सैकड़ों बन जाए
पर उसे घर बनाए गृह लक्ष्मी।
एक छोटी सी झोपड़ी मे भी
प्रेम रूपी दीवार,
सामंजस्य की छत,
सत्कार रूपी खिड़की लगाएं
वह है गृह लक्ष्मी।
जब से वो अस्तित्व में आई
सिर्फ खुशियां ही लुटाई।
अपने पायल की झंकार से,
घर छनकाई गुहलक्ष्मी।
बेटी बन लक्ष्मी लाई,
बहन रूप में प्यार की लुटाई।
मां बन ममता के सरोवर में
गोता लगाई गृहलक्ष्मी।
लिया रूप जब अर्धांगिनी का
पति के जीवन को
संपूर्ण बनाई हुई लक्ष्मी।
जब तक रही
चीजों को संजोग संजोग
धन जुटाए गृहलक्ष्मी।
अपने स्नेह से घर को
खुशहाल बनाए गृहलक्ष्मी।
अपने इसी गुणों के कारण
कहलाए लक्ष्मी गृह लक्ष्मी।
डॉ अलका कुमारी
(झारखंड) रांची
Nice
ReplyDeleteheart touching lines
Delete