कवयित्री - इन्दु कुमारी
राज्य - झंझारपुर बिहार
शीर्षक - एकता
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एकता
एक एक फूल से बनती है माला
एक एक धागे से बनती है दुशाला
एक एक फूल से
खिल जाती है बगिया
एक एक बुंद से
बन जाती है नदियां
मुठ्ठी में जो शक्ति है
उंगलियों में नहीं
रस्सी में जो शक्ति है
धागे में नहीं
देश की तरक्की एकता में हैं
लाखों चलें जब साथ साथ
कोई कर सकता वार नहीं
इन्दु कुमारी
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