कवियत्री -रश्मि अग्निहोत्री
शीर्षक -विवाह
राज्य- छत्तीसगढ़
*विवाह* जीवन भर का
निर्वाह है।
*विवाह* एक समझौता है ,
दो परिवारों के बीच
खुशियां बांटने का।
एक संस्कार,एक रिवाज़ है
दो ज़िंदगियों की मुस्कुराती
खिलखिलाती आवाज़ है।
हो सकता है विचार न मिले
आपस में किसी के लेकिन
एक दूजे की खुशी के लिए
त्याग है *विवाह*।
*विवाह* ईश्वर की
वह नियमत है,
जो आसमान में
तय होती है
और किस्मत से
बनती है जोड़ी
दाम्पत्य जीवन की।
*विवाह* के वर्तमान में
मायने न बदलने पाये
संस्कारों और विरासत के
रिवाज़ न ढलने पाये।
अपनी आने वाली
" रश्मि" पीढ़ी को
सम्बन्धों की कद्र
हम भी सिखायेंगे
और हमारे ही निशां
पर वे चलते जायेंगा,,,
क्योंकि,, *विवाह*
जीवन भर का निर्वाह है।।
रश्मि अग्निहोत्री
बहुत सुंदर
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत कविता रश्मि जी
ReplyDeleteअति उत्तम
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