Monday, December 2, 2019

बिहार से कंचन प्रभा की कविता- मेरा गांव

कवयित्री- कंचन प्रभा
राज्य- दरभंगा , बिहार
शीर्षक- मेरा गाँव


         मेरा गाँव 


सर्वगुण सम्पन्न अभिलाषा 
आदर्श गाँव की परिभाषा
किसानो की नगरी है
नार भरती गगरी है
पीले पीले सरसो के खेत
कहीं नदी तो सपनीले रेत
ज्ञान बांटते विद्यालय हो
घर घर बना शौचालय हो
रंग बिरंगे फूल खिले हो
कलकल करती नदियाँ बहती
छमछम करती सखियाँ हँसती
पेड़ो के झुरमुट मे छुप कर
बच्चे खेले टहनी पर चढ़ कर
सुर्य की नई छटा नारंगी
बैजू बैठा लिये सारंगी
पंछी गाते गीत सुरीले
चूल्हों पर चढ़ गये पतीले
भोर भये नीपे घर आँगन
सजे नार मुस्काये साजन
होते ऐसे गाँव अलबेले
लगते रोज अनोखे मेले

*कंचन प्रभा*
*दरभंगा बिहार*

15 comments:

  1. I liked this poem😍😍😘😘

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  2. Replies
    1. ये शीर्षक ज्यादा अच्छा होता
      ऐसा हो मेरा गाँव 🤗🤗

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  3. Beautifully expressed . The purity of village where health, happiness , Knowledge and natural beauty all can be seen together .
    The beauty of poem is everything is said in such simple words and I can visulaize it while reading the poem .


    Very Very well written !!

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  4. Aapki kabita Mera gawn bahut acchi poem hai.Fantastic poem.👌👌vikramshila from Anju wala

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