कवि••शंकर गोयल
शीर्षक••गीत
राज्य••छत्तीसगढ़
सम्पर्क••
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गीत
विद्रोही स्वर तेरे हो तो ,
आग रूपी शब्द मुझसे ले ले।
संगीत साज तेरे हैं तो,
मधुर गीत तो मुझसे ले ले।
कर्म दान तेरे हो तो,
कर्म ज्ञान तो मुझसे ले ले।
नयन यदि तेरे हो तो,
सपनों का संसार मुझसे ले
ले ।
आत्म सम्मान तुझमें हो तो,
आत्मबल तू मुझसे ले ले।
नजरें जीने की तेरी हो तो,
जीवन दर्शन मुझसे ले ले।
यदि ज्ञानदीप तेरे हो तो,
विचार रोशनी मुझसे ले ले।
शंकर गोयल
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