नाम - गजेंद्र द्विवेदी गिरीश
राज्य - छत्तीसगढ़ (भिलाई 3)
संपर्क - 7000858588
शीर्षक - प्रेम का पाश
हर प्रयास इस राह में फिजूल होगा!
चैन आएगा, जब तेरा दखल होगा।।
भटकने दो भीड़ में भले यूँ अनजाने,
अकेले में सब व्यर्थ का नकल होगा।।
तेरी पलकें जो कर दे एक इशारा भी,
इशक का सबसे अजूबा मिसल होगा।।
मुस्कुरा दो अधखिले कमल सी तुम,
संवरेगी हर सांस, जो विकल होगा।।
चल पडूंगा संग क्षितिज के अंत तक,
तू है तो सब मंगल ही मंगल होगा।।
दिल डूब जाए तेरे प्रेम के कर्ज में,
तभी इस पाश से जीत असल होगा।।
गिरीश भी इंतजार में है कि नजर पड़े,
मेरे इश्क का यही जवाब सरल होगा।।
(C) गिरीश
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