कविता का नाम-कुपोषण दूर भगाना है।
स्थान-कोंडागांव(छत्तीसगढ़)
*कुपोषण दूर भगाना है*
कुपोषण दूर भगाना है संगी कुपोषण दूर भगाना है।
सुनो सुनो संगवारी सुनो.........
सबको जोर लगाना है भैया ,कुपोषण दूर भगाना है।
गांव के दीदी,गांव के दादा।
शहर के बहिनी,शहर के भैया।
सुनो सुनो संगवारी सुनो कुपोषण दूर भगाना है।।1।।
जनम के पहिली,जनम के बाद में।
खून के कमी के नहीं हे ठिकाना।
आंगनबाड़ी मा,अस्पताल मा।
हमको है जाना,तुमको है जाना।
सुनो सुनो संगवारी सुनो,
कुपोषण दूर भगाना है भैया कुपोषण दूर भगाना है।।2।।
गांव के माझी,गांव के चालकी।
गांव के डॉक्टर,गांव के गुरुजी।
गांव के सियान,गांव के सरपंच।
सब झन मिलके,करबो जतन।
सुनो सुनो संगवारी सुनो
कुपोषण दूर भगाना है भैया कुपोषण दूर भगाना है।3।
रामु के बाड़ी में ,मुनगा भाजी।
श्यामू के बाड़ी मा,पपीता भारी।
भाजी खाना ,आयरन बढाना।
आंगनबाड़ी मा ,वजन कराना।
पोषण केंद्र मा ,भरती कराना।
सुनो सुनो संगवारी सुनो,छत्तीसगढ़ को आगे बढ़ाना है।
कुपोषण दूर भगाना है संगी कुपोषण दूर भगाना है।4।
डी राज सेठिया।
कोंडागांव
बहुत बढ़िया रचना है सेठिया जी
ReplyDelete