रचनाकार-पवन गौतम बृजराही बमूलिया
विषय/शीर्षक--नववर्ष मनाकर विश्व पटल पर काव्य का गुंजन कर ले।
(धुन-हर वेश में तू हर देश मे तू तेरे नाम अनेक तू एक ही है।)
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गीत (पैरोडी) नव वर्ष शारदा वन्दन
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नववर्ष मनाकर विश्व पटल पर काव्य
का गुंजन कर ले।
मेरी कविता और ट्रेंड के संग में माँ
शारद वन्दन कर ले।
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माँ सरस्वती का आराधन हम साहित्य
संग गाएंगे।
संग में काव्य पोस्ट अरु छंद विधान
सजायेंगे।।
मन से तन से और जीवन से साहित्य
का सन्धान करे।
जो है समाज मे व्याप्त त्रुटि को निज
लेखन से निदान करे।।
सब मिल जुल कर वीणा वाणी का
ध्यान करे पूजन कर ले।।
नववर्ष मनाकर विश्व पटल पर काव्य
का गुंजन कर ले।।
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रस छन्द अलंकृत नवरचना को नये
वर्ष में लिखना है।
माँ हंसवाहिनी सलिला की धारा के
संग संग बहना है।।
तीन लोक और सप्त खण्ड सब भुवन
में गीत प्रवाहित हो।
अपने मन चित्त अरु प्राण तलक भव
भाव बिम्ब समाहित हो।।
अंतिम पंक्ति की अन्तिमता तक त्याग
करे मंथन कर ले।
नववर्ष मनाकर विश्व पटल पर काव्य
का गुंजन कर ले।।
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सरिता प्रवाह कविता धारा में जी भर
कर स्नान करे।
उस दिव्य पुंज की मधुर गूँजमें पुलकित
हृदय तमाम करे।।
काव्य पोस्ट ब्लॉग रथ जब आकर
द्वारे खड़ा हुआ।
होकर सवार जीवन पथ पर गौतम ले
पोथी अड़ा हुआ।।
व्योम पत्र पर विटप क़लम सिंधु स्याही
अर्पण कर ले।
नववर्ष मनाकर विश्व पटल पर काव्य
का गुंजन कर ले।।
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पवन गौतम बमूलिया
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