शीर्षक : _फिर एक दिसम्बर गुजर रहा है_
पता : ग्राम भरदा, जिला बालोद (छत्तीसगढ़ )
फिर एक दिसम्बर गुजर रहा है ।।
यादों का मेला कुहरों की धुंध में सिमट रहा है ,
जिंदगी के बगीचे का एक फूल फिर गिर रहा है,
खुशियों की बहार और दुख का दौर ,
नई सौगात लाने को तरस रहा है,
फिर एक दिसम्बर गुजर रहा है।।
कुछ यादें कुछ चेहरे जुड़ते गए वक्त के साथ,
अब वक्त का दौर आगे बढ़ चला है,
दुख सुख मौज मस्ती समेटे वाला था यह साल ,
बसंत के आने पर खुशियों को लुटा रहा है,
जिंदगी की सीढ़ी में एक कदम और बढ़ा रहा है,
फिर एक दिसम्बर गुजर रहा है।।
नहीं भूल सकता तेरे अहसान को,
नहीं छोड़ सकता तेरे बलिदान को,
कैसे अदा करू तेरा कर्ज,
तेरे दिए हुए मेरे पहचान को,
कर्म की साख पर फिर सवाल उठ रहा है,
फिर एक दिसम्बर गुजर रहा है।।
काश नया साल ऐसा हो,
कुदरत के करिश्में जैसा हो,
तमन्ना हो आसमान को छूने की,
दुनिया पूरी मुट्ठी में हो,
वह साल बहुत मौके ला रहा है,
फिर एक दिसम्बर गुजर रहा है।।
*नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं*
~_*-Sanjay kumar-*_~
Super 👌👌👌
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteSuper 👌👌👌
ReplyDeleteKya bat
ReplyDeleteI proud of you my chacha
ReplyDeleteTera yah likhna kamal hai bas tu likhte ja ye khuda ka aashirvad hai
ReplyDeleteKai jhammmmm
ReplyDeleteAapke Ashaanurup ho Aapka nutanwarsh 💐🤗
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