स्थान - कसडोल , छत्तीसगढ़
*शीर्षक - नव वर्ष का पैगाम*...
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नव वर्ष की नई सुबह पर ,
कुछ ऐसा काम कर लें !
छोटों को दे स्नेह ,
बडों को प्रणाम कर लें !
इस कडकती ठण्ड में सीमा पर
जो खडें हैं हमारी खातिर ;
सर्वप्रथम उन जवानों को,
सलाम कर लें !
इमानदारों को आजकल
मिलने लगी है गालियां ,
चलो इसी बहाने ,
बेईमानों का कत्लें आम कर लें !
सफेद पोशों ने आवाम को
समझ रखा है अपनी जागीर ,
चलो दिखाए वतनपरस्ती
उन गद्दारों को गुलाम कर लें !
बाँटते चले हम हर किसी को
खुशियां - प्यार की नेमत ,
सबकी महकती सुबह
और खुशनुमा शाम कर लें !
2019 चला गया
कुछ खट्टी - मीठी यादें देकर ,
बीत न जाए कोई लम्हा
2020 को अपने नाम कर लें !
नव वर्ष की शुभ बेला पर
कविवर ' चेतन' कहे सुन भाई साधो ,
इससे पहले कि *रावण* बन जाए कोई
हम सब खुद को *राम* कर लें !
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चेतन सिंह
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