2.शिर्षक-बोट अधिकार
3.राज्य-छत्तीसगढ़
"बोट अधिकार"@
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येदे ईली दखा लोगतंत्र चो सबले बड़े तिहार।
बोट दिऊक लाय जातोर आय सफाय परिवार।
हमचो बोट आय हमचो बल, अकल,आपलो अधिकार।
दखा बोटके बिका नही काजे बोतलक मंद आरु कुकड़ीगार।
तुचोय ले देश बदलेदे तुय बदलाव चो दिया तो बार।
छापा दखुन बोट निदीहा,निदीहा दखुन सेट-सौकार।
मनुख दखुन बोट दीहा,दीहा नंगत पढ़ालिखा समझदार।
बाड़ती उआट बीता मनुख के जीतातोर आय बनो सरकार।
बोट चो बल के नोट मे घेनुक ईयुआत चोर चमार।
अरु जेदिन सरकार चो कुर्चि ने बठले करदे हत्या बलत्कार।
आमी सत्ते नियाय काजे गुहार लगालो में बले नी देत हुकार।
असने काजे दादा नि बीकतो आय आपलो बोट अधिकार।
हमचोय मन ले बदलेदे देश दुनिया,पारा परीवार।
बोट चो बिकरी-भांजरी नी होयदे, होयदे नफा चो सरकार।
पिला-पिचका चो पढ़ालिखा में बाड़ती होयदे बनदे डाँ., तहसीलदार।
सबाय काजे नंगत राशन मिरेदे अरु सुन्दर घर-बार।
गाँव-गाँव ने स्कुल होयदे,होयदे थानागुड़ी अरु नाकेदार।
सरकार ने अच्छा मनुख रलेक नीहोयदे गुण्डागर्दी,बलत्कार।
हमचोय मनुख होलो ने हमचो संस्कृति चो करेदे बिस्तार।
धियान दैयदे बस्तरीया चो जीवना आरू जमाय धन्धा निस्तार।।
जम्माय सियान सजन दादा दिदी मन के मचो पाण्डे बस्तरीया चो ईतरोय गुहार,नि बीकासे कोनी आपलो बोट अधिकार।।
गिरिजा प्रसाद पाण्डे
कोण्डागाँव(बस्तर)
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