Monday, December 23, 2019

राजस्थान से बजरंग लाल सैनी "वज्रघन" की रचना- हरि-स्मरण

बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
राज्य - राजस्थान
संपर्क - 8769764786
शीर्षक - - हरि-स्मरण

प्रातः वंदना 
हरि नाम स्मरण कर ले बंदे,
जीवन का कोई ठिकाना नहीं।
उस पिता से जोड़ ले नाता,
वह अपना है पराया नहीं।
ये भवसागर है काल का चक्र,
बचने का कोई ठिकाना नहीं।
माया मोह की नाव में बैठकर,
तू इसमें डूब जाना नहीं।
हरि नाम स्मरण कर ले बंदे,
जीवन का कोई ठिकाना नहीं।
यह तन विष की बेल है ,
अज्ञानी तू भूल जाना नहीं।
काम-क्रोध, मद-लोभ, मोह , 
स्वार्थ में तुम लग जाना नहीं। 
संसार एक जर्जर बेड़ा है, 
भवसागर में डूब जाना नहीं। 
हरि नाम स्मरण कर ले बंदे, 
जीवन का कोई ठिकाना नहीं। 
यह तेरा है यह मेरा है, 
इस भ्रम में पड़ जाना नहीं। 
सबसे मिलजुल कर चल, 
किसी को भी कभी सताना नहीं। 
छल-प्रपंच कपट में पड़कर, 
काल का बन जाना निशाना नहीं। 
हरि नाम स्मरण कर ले बंदे, 
जीवन का कोई ठिकाना नहीं। 
ये जग बस कुछ दिन का डेरा है, 
किसी का स्थायी ठिकाना नहीं। 
आया है तो जाना होगा, 
बचने का कोई बहाना नहीं। 
राम नाम से पार ना उतरा, 
ऐसा कोई दीवाना नहीं। 
हरि नाम स्मरण कर ले बंदे, 
जीवन का कोई ठिकाना नहीं।

12 comments:

  1. तनसुख
    वाह जीवन का कोई ठिकाना नहीं

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  2. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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  3. "आया है तो जाना होगा,
    बचने का कोई बहाना नहीं।
    राम नाम से पार ना उतरा,
    ऐसा कोई दीवाना नहीं।" वन्दना का मूल भार इन चार पंक्तियों में डाल कर रचना को जीवन्त बना दिया। धन्य हो गुरु।

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