राज्य-दरभंगा,बिहार
शीर्षक- गृह लक्ष्मी
*गृह लक्ष्मी*
घर की गृह लक्ष्मी तु
तु देवी का स्वरूप है
रखे घर का पूरा ध्यान
दुर्गा सरस्वती का रूप है
जब कोई पड़े बिमार
तु चिकित्सक बन जाती है
जब कोई करे सवाल
तु शिक्षक बन जाती है
दो हाथ है तेरे पर तु
दस हाथों का काम है करती
चलती रहती पुरे दिन तु
किसी काम से नही तु थकती
रखती सबका पूरा ख्याल
बुढ़े बच्चे हो या लाचार
तरह तरह के पकवान बना कर
खुब लुटाती अपना प्यार
*कंचन प्रभा*
*दरभंगा बिहार*
Nice poem....
ReplyDeleteGajab Kavita likhati hai aap
ReplyDelete🙏🙏⚘⚘
DeleteMast
ReplyDeleteNice though about poem
ReplyDeleteNice poetry and good rhyming
ReplyDeleteबढ़िया
ReplyDeleteBahot badhiya
ReplyDeleteBahut khub
ReplyDeleteVery nice
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