शीर्षक- *सुनो ज़रा*
राज्य-उत्तर प्रदेश
सम्पर्क सूत्र-
सुनो ज़रा,
कुछ कहने की एक आस जग गई है,
जो वर्षों थी दबी वो प्यास जग गई है,
सिहरन सी है हवाओं में,
मद्धम मद्धम फ़िज़ाओं में,
जो दफन किया था हमनें,
आज फिर वो खुशबू बिखर गई है,
सुनो ज़रा,
बोझिल थे पग हमारे जो तेरे लिए बढ़े थे,
बेखबर थे हम भी थोड़ा जब तुझसे दूर खड़े थे,
साँसों सरगम की धुन सी,
चितवन भी मधुबन सी,
जो तस्वीर हमने बनाई ,
अब वो कहानी रूमानी सी बन गई है,
सुनो ज़रा,
नज़दीकी अब दिलों से कम होने न देंगे हम,
जो सपने संग बुने हैं वो खोने न देंगे हम,
तेरे आहट की गूंज गर न होगी,
हम फिर भी रोशन जहान अपना कर लेंगे
सुनो ज़रा ,
कुछ कहने की एक आस जग गई है,
जो वर्षों थी दबी वो प्यास जग गई है.....
✍️✍️✍️राग
वाह जी बहुत खूब
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