Tuesday, December 31, 2019

छत्तीसगढ़ से दिनेश कुमार विश्वकर्मा की रचना- नया है ये दिन

कवि:दिनेश कुमार विश्वकर्मा
शीर्षक: नया है ये दिन
राज्य: छत्तीसगढ़
************************
एक कैलेंडर महज़
एक कैलेंडर नहीं होता।
हर एक सेकेंड ने रेशम से बुना है इसको
किसी ने डायरी पे अपनी
दिन, तारीख़, समय लिखकर
अपने लक्ष्य को पक्का कर लिया हो
तब से कैलेंडर उसे सचेत करता रहता है
क्योंकि एक कैलेंडर महज़
कैलेंडर नहीं होता

अपने आराध्य की जयंती
या पर्व कोई
अपने पंचांग से मनाते हैं।
स्वयं की जन्म तिथि की खुशी
इसी कैलेंडर से जाहिर होती है।
अपने-अपने देश, मान्यताओं में
नव वर्ष अलग-अलग हो सकते हैं।
फिर भी ये एक नज़रिया है कि
ये रात अंतिम है, जिसे उमंग से काटना है
ये दिन पहला है, बस खुशी बाँटना है।
किसी दीवार पर ये कैलेंडर
जनवरी बताये तो...
पूरा घर नया सा लगता है।


दो तारीख़ के बीच किसी 
सताये हुए को न्याय मिल सकता है।
आफ़ताब या माहताब
या के मौसम कोई
सब अपने रवानी पे रहते हैं
ग़ालिबन हमने ही अपनी
सहूलियत से इस कैलेंडर को
अलग-अलग सांचे में ढाल रखा है।

इस कैलेंडर के हर सफ़हे पर
दर्ज हैं महान व्यक्तियों के नाम
जिसने ख़ल्क़ के भले के लिए
अपना जीवन लगा दिया।
यही मौक़ा सबको बराबर
देता है ये कैलेंडर
क्योंकि एक कैलेंडर
महज़ एक कैलेंडर नहीं होता...

***********************
दिनेश कुमार विश्वकर्मा
छत्तीसगढ़

3 comments:

  1. शुक्रिया द्विवेदी जी

    ReplyDelete
  2. Amazing bhaiya .. actually the calendar hi h jo new year ko new year aur birthday ko birthday banata h

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...