पता छतीसगढ़
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शीर्षक- याद आथे पान रोटी
अब तो मिलथे दाई शहर में,पिज़्जा बर्गर डबलरोटी।
लेकिन दाई खूब याद आथे,
तोर हाथ के बनाय पान रोटी।
तोर हाथ के बनाय तिवरा भाटा के साग।
पनीर भुर्जी ला खा खा के फुट गे भाग।
अब नही मिले दाई पाताल के चट नी ,
तोर हाथ के बघरे उड़द के दाल,
बहु के हाथ तोर हाथ के जैसे नही
है स्वाद के उबाल,
अबढ़ याद आते दाई तोर मया दुलार
तोर हाथ के ,सोतीं ओउर मार
डेडरी खुरमी,फरा के बघार।
ओखर खुशबू याद करके आथे
दाई मुहूं में,लार।
अब नही मिले ,वो,फुलरोटी
दाई याद आते वो तोर हाथ
के पान रोटी।अनिलशुक्ल
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