Wednesday, December 18, 2019

बिहार से निकेश सिंह निक्की की रचना- नारी

निकेश सिंह निक्की 
 समस्तीपुर बिहार 
  मो-7250087926
  
 शीर्षक:- नारी 


  तुम्हीं हो जग उद्धारक नारी,
   तुम्हीं हो जग संघारक काली।
  कहीं ममता श्रृंगार प्रेम की,
  सुनो हे जननी सखी प्यारी।

  तेरी रूप है बहुतेरे,
  सीता सावित्री अति धनेरे।
  कहीं पत्नी बन प्रेम विखेरे, 
  तो कहीं दिखें ममता तेरे।

  कहीं कमल की कली बनकर,
   पुरुषों को अति लुभाया है।
   तो कहीं सीता बनकर तुमने,
    लंका में विध्वंस मचाया है।

   जब प्रेम पत्र लिखी तो,
    संसार सजी श्रृंगार से।
    जब काली बनकर आयी तो,
     शीश कटा करवाल से।

      कहे निकेश हे नारी तेरी,
      है अजब रूप बहुतेरे।
       कहीं खिले हैं श्रृंगार सुमन,
       कहीं ममता के मेले।
                 निकेश सिंह निक्की

1 comment:

  1. दिनेश कुमार विश्वकर्माDecember 18, 2019 at 8:11 PM

    अच्छी रचना nikesh जी

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