राज्य-दरभंगा बिहार
शीर्षक-फूलों की महिमा
*फूलों की महिमा*
फूलों की हंसी हमें
मुस्कुराना सिखाती है।
प्रेम की राह में
दिव्य प्रभा दिखाती है।
गुच्छे गेंदे की
एकजुट्ता सिखाती है।
मिल कर रहने की
राह बताती है।
पथरीली राहों में गुलाब
चलना सिखाती है।
काँटे लाख हो राहों में
खिलते रहना बताती है।
बेला धुंध में भी
महकना सिखाती है।
परिस्थिति कैसी भी हो
खुशबू फैलाना बताती है।
कचनार के फायदे रोग से
निपटना सिखाती है।
घरेलू औषधी से
उपचार करना बताती है।
*कंचन प्रभा*
*दरभंगा बिहार*
प्रशंसनीय
ReplyDelete🙏🙏
ReplyDeleteसुन्दर रचना ।
ReplyDeleteMost beautiful and good composition by you
ReplyDeleteAti sundar ❤
ReplyDeleteव्यवहारिक, उपयोगी व रचनात्मक रचना
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteAap vi phul kind tarah hasti rahein
ReplyDeleteआपकी कविता "फुलों की महिमा"काफी प्रशंसनीय है।
ReplyDeleteMind blowing poem my sweet 💓❤️❤️❤️ sis.
ReplyDeleteThanku
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