कवि : डॉ. संजीव शमा
राज्य : झंझारपुर,बिहार
संपर्क : 9934430045
शीर्षक : तुम बिन
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तुम बिन
कैसा जीवन जीना तुम बिन,
जीवन-पथ है सूना तुम बिन,
जीवन सङ्ग तुम रीत निभाना,
प्रीत की डोर न टूटे तुम बिन ।
मान घटे दिल पत्थर कर लूं,
बहता आँसू आँखों में भर लूं,
बीच फंसी मंझधार तेरे बिन,
नैया पार न लागे तुम बिन ।
पार करो पतवार बनो तुम,
जीवन नैया पार करो तुम,
माथे की बिंदी हार बनो तुम,
बीते ना ये जीवन तुम बिन ।
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डॉ. संजीव शमा
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