Monday, December 2, 2019

छत्तीसगढ़ से संजय कुमार की कविता- बचपन का जमाना

नाम - संजय कुमार 
राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - "बचपन का जमाना "

***************

कहां आ गए हम इस समझदारों की दुनिया में ,
इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था ।

न सम्मान का मोह 
और  न अपमान का डर था 
न दोस्ती का मतलब पता था
और न  मतलब की दोस्ती थी 
जो एक बार कह दिया उसका मतलब भी नहीं समझते थे ,
और आज इतने मतलबी हो गए की कोई कुछ कह दे तो मरने और मारने तक को तैयार हो जाते हैं ,

क्या खूबसूरत था वो बचपन का पल ,
पेट में पेड़ उगने के डर से ,
संतरे को निचोड़ निचोड़ कर खाते थे ,
क्यों हो गए आज हम इतने अभिमानी ,
की अपना अपमान होने पर 
खुदकुशी तक कर जाते है ,   और ,
मां बाप के सपने को मिट्टी में मिला जाते है ।

कितना  मौज मस्ती वाला था वो बचपन ,
पीठ पर बस्ता , गले में बोतल ,
आंख में चश्मा और माथे पर होमवर्क न करने का डर ,
फिर भी होंठो में मुस्कान ,
और नादानियों भरे शरारतें  थी ,

न किसी से डरते थे ,
और न किसी पर मरते थे ,
किसी से झगड़ा होने पर भी ,
उसके लिए  क्या क्या नहीं करते थे ,

क्यों आ गए हम इन समझदारों की दुनिया में साहब ,
इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था ।।

~ _sanjay kumar sahu_

10 comments:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...