नाम - संजय कुमार
राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - "बचपन का जमाना "
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कहां आ गए हम इस समझदारों की दुनिया में ,
इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था ।
न सम्मान का मोह
और न अपमान का डर था
न दोस्ती का मतलब पता था
और न मतलब की दोस्ती थी
जो एक बार कह दिया उसका मतलब भी नहीं समझते थे ,
और आज इतने मतलबी हो गए की कोई कुछ कह दे तो मरने और मारने तक को तैयार हो जाते हैं ,
क्या खूबसूरत था वो बचपन का पल ,
पेट में पेड़ उगने के डर से ,
संतरे को निचोड़ निचोड़ कर खाते थे ,
क्यों हो गए आज हम इतने अभिमानी ,
की अपना अपमान होने पर
खुदकुशी तक कर जाते है , और ,
मां बाप के सपने को मिट्टी में मिला जाते है ।
कितना मौज मस्ती वाला था वो बचपन ,
पीठ पर बस्ता , गले में बोतल ,
आंख में चश्मा और माथे पर होमवर्क न करने का डर ,
फिर भी होंठो में मुस्कान ,
और नादानियों भरे शरारतें थी ,
न किसी से डरते थे ,
और न किसी पर मरते थे ,
किसी से झगड़ा होने पर भी ,
उसके लिए क्या क्या नहीं करते थे ,
क्यों आ गए हम इन समझदारों की दुनिया में साहब ,
इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था ।।
Sahi bat h brother
ReplyDeleteTabadtod
ReplyDeleteEk dam फाड़ू
ReplyDeleteGood job
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteKeep it up
ReplyDeleteGo ahead
ReplyDeleteNice topper
ReplyDeleteAre jio mere topper likhte rhe kavigya bnega😊
ReplyDeleteThank you all of you,
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