नाम- राहुल कुमावत
पता- श्रीमाधोपुर,(सीकर)
राजस्थान
शीर्षक- "रूह"

"रूह"
है रौशनी फिर भी,न जाने क्यू अँधेरा है
जलती हुई शमा के,चारों और पहरा है
लगा है पहरा तो,शमा ये बुझ ना पायेगी
हटा ये पहरा तो,हकीकत झिलमिलायेगी
छिपकर नकाबों में यूँ,खुद को खोएगा,कब तक
इक दिन तेरे रुख को,तेरी रूह,छू ही जायेगी...
बहती नदी है तू,बहता समंदर है
ना खोयी वो लहरें,तेरे जो अन्दर है
जो उठी लहर इक बार,तो फिर रुक ना पायेगी
ये शांत लहरें इक दिन जब,सुनामी बन जायेगी
अंतर्मन के इस चक्रवात को,रोकेगा कब तक
इक दिन तेरे रुख को,तेरी रूह छू ही जायेगी...
तू है जुदा सबसे,अलग है आईना तेरा
है भीड़ करोड़ों की,अलग है मायना तेरा
है हुनर तेरा,शमशीर तेरी,जब ये चल जायेगी
साहस,हौसला,हिम्मत,जूनून,ताकत बन जाएगी
लाचारी,बेबसी,दर्द ओ ग़म तू झेलेगा कब तक
जय हो
ReplyDeleteरूहानी नज्म, शानदार ,जानदार जोरदार
तनसुख
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