Tuesday, December 3, 2019

छत्तीसगढ़ से शैलेन्द्र चेलक की रचना- पीड़ा

नाम - शैलेन्द्र चेलक
शीर्षक - पीड़ा 
सम्पर्क -९०९८५१८९७६
पता - पेंडरवानी , बालोद ,छ. ग.।

       पीड़ा

एक बार फिर आँखे नम है ,
दिलों में गम ही गम है ,
दिल के गुबार निकले कैसे ,
कितने ही मोमबत्तियां जलाएं, मोर्चे निकाले कम है ,

न जाने कितने रंगों में ,शक्लों में ,
मुश्किलें ही मुश्किलें हैं ,
तंग सोच है जहां की ,
और उसी जहां पे हम हैं ,

लड़ने का जज़्बा भी है ,
हौसला बुलंद है ,
गिद्धों की भरमार है ,
मददगार चंद है हैं ,

कहीं आग से जलती ,
कहीं दिल जलता है ,
कहीं सिमट कर मिट जाती ,
कहीं मिटाने का सबब पलता है ,

क्यूं तंग गालियां है ,
मिटती कलियां है ,
कानूनों की भरमार है ,
कई रंगरलियां हैं ,
आखिर क्यूं ...आखिर क्यूं ...
( भाषण नही एक्शन चाहिए )
 
    - शैलेन्द्र चेलक -

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