Friday, December 6, 2019

छत्तीसगढ़ से डीसी त्रिपाठी की रचना-

कवि -- डीसी त्रिपाठी
 रायपुर  छत्तीसगढ़
संपर्क 9893900105

शब्द --- दामिनी,दरिंदे, 
            शिकायत, अन्धाकानून, सीख ।
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नरभक्षी  की  नजरों  में होता  कोई  गुनाह  नहीं ,
#दामिनी के दामन पे दाग हो इसकी परवाहनहीं।

#दरिंदे बेख़ौफ़ घूमते हैं तलाशने अपना शिकार ,
उनकी इस हरक़त पर रखता कोई  निगाह  नहीं।

#शिकायत किससे करोगे सभी तो बहरे  हैं  यहाँ,
मुर्दों की बस्ती है साहब यहाँ कोई  बेगुनाह  नहीं।

#अंधा_कानून की बदौलत बच जाते हैं मुजरिम,
पैरवी ठीक से होती नहीं मिलता कोई गवाह नहीं।

#सीख बस इतनी  सजग रहकर  जुर्म को रोको,
किसी द्रोपदी की लाज बचाने आएगा शाह नहीं।

हवस की भूख जिन्हें है मानवता के दुश्मन हैं वो,
बुरी आदत से बचने की मिली कभी सलाह नहीं ।

बंदआँखों से किसी पर यक़ीन मत करो#दिवाकर,
नासूर दिल में हो जाये तो जाता कभी विदाह नहीं। 

दिवाकर चंद्र त्रिपाठी
रायपुर--छत्तीसगढ़

3 comments:

  1. सुंदर समसामयिक रचना

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  2. सुन्दर काव्यांजलि ।

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  3. कुँवर चन्द्र त्रिपाठी ,उत्तर प्रदेश - लखनऊ ।

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