Wednesday, December 18, 2019

बिहार से रुपेश कुमार की रचना- यादों के पल

कवि का नाम ~ रुपेश कुमार
राज्य ~ चैनपुर , सिवान , बिहार
शीर्षक ~ यादों के पल

शायद हम तुम ,
अब कभी मिल नही पायेंगे ,
सिर्फ रह जायेगी ,
एहसासों का सिलसिला ,

और उन गुजरे हुये पलों का ,
एक यादों का झरोखा ,
जिसमे मेरा और तुम्हरा था ,
मिलना और झगड़ना ,

काश हम तुम एक हो जाते ,
ना रह जाती तुम्हरा - मेरा ,
ना कोई शिकवा ना कोई शिकायत ,
रह जाती तो सिर्फ एक खिलता गुलाब ,

इस नासमझ दुनिया मे ,
दो दिलो का मिलन ,
जिसमे रह जायेगी जाती है ,
एक हमदम एक आश ,

प्यार प्यार ना रहता ,
सिर्फ रह जाती है ,
आशा , विश्वास और एक आरजू ,
और सिर्फ रोना , सिसकना ,

आशायें, इबादते , विश्वास ,
ये सिर्फ एक दिखावा है ,
जो प्रेम की अधुरेपन का ,
पल पल दिल का दर्पण है ,

प्यार अंधेपन का दुसरा रुप है ,
जिसमे ना खुशी होती है ना दुख ,
सिर्फ एक गहरा जीवन भर का ,
ना भूलने वाली , ना मिटने वाली ,

यादों यादों का,
रहस्मयो का घाटी,
जहाँ तड़प, एहसास ,
और एक यादगार पल !

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