राज्य ~ चैनपुर , सिवान , बिहार
शीर्षक ~ यादों के पल
शायद हम तुम ,
अब कभी मिल नही पायेंगे ,
सिर्फ रह जायेगी ,
एहसासों का सिलसिला ,
और उन गुजरे हुये पलों का ,
एक यादों का झरोखा ,
जिसमे मेरा और तुम्हरा था ,
मिलना और झगड़ना ,
काश हम तुम एक हो जाते ,
ना रह जाती तुम्हरा - मेरा ,
ना कोई शिकवा ना कोई शिकायत ,
रह जाती तो सिर्फ एक खिलता गुलाब ,
इस नासमझ दुनिया मे ,
दो दिलो का मिलन ,
जिसमे रह जायेगी जाती है ,
एक हमदम एक आश ,
प्यार प्यार ना रहता ,
सिर्फ रह जाती है ,
आशा , विश्वास और एक आरजू ,
और सिर्फ रोना , सिसकना ,
आशायें, इबादते , विश्वास ,
ये सिर्फ एक दिखावा है ,
जो प्रेम की अधुरेपन का ,
पल पल दिल का दर्पण है ,
प्यार अंधेपन का दुसरा रुप है ,
जिसमे ना खुशी होती है ना दुख ,
सिर्फ एक गहरा जीवन भर का ,
ना भूलने वाली , ना मिटने वाली ,
यादों यादों का,
रहस्मयो का घाटी,
जहाँ तड़प, एहसास ,
और एक यादगार पल !
याद्दे
ReplyDelete