ऱाज्य_ छत्तीसगढ
मोबाइल ९९९३८१९४२९
शीर्षक _ मिलन
______
प्याज ने लहसून से कहा,
बहन क्या हुआ,
लहसून ने कहा,
होना क्या है,
मै भी मंहगी हो गई हूं,
लोगों मे किरकिरी बन गई हूं।
सुना है खाद्य तेलो की,
कीमत भी बढने वाली है,
हम सब पर मुसीबत,
बड़ी ये छाने वाली है।
प्याज ने कहा,
लहसून बहन सुनो,
आज कढाई मे जब,
तेल आये,
यह रसोई खूब,
मंहकाये,
फिर शायद यह दिन,
कल आये न आये।
और अपना रोज का मिलन,
भारी पड़ जाये।
हम बिछड़ जाये।
___ संतोष श्रीवास्तव सम।
कांकेर छग।
No comments:
Post a Comment