"शिव संगीनी"
विधा : कविता
राज्य : अंकलेश्वर,
गुजरात
*बेटा*
उठो ,जागो ,बेटो
अब तुम्हारी देश की
इज्जत की बारी आई है
भगत सिंह और शहीदों
जैसा बनना है तुमको
भगत सिंह ने देश बचाने
में अपनी ताकत लगाई थी
जान न्योछावर करकर
लोगों में देशभक्ति बढ़ाई थी
आज चारों तरफ लूट रही
मां बहनों की इज्जत
तार तार हो रही
अब तो जाने भी जा रही
जिंदा जलाई जा रही
कहीं गला घोटकर
कही दफनाए जा रही
कैसे तुम देश के बेटे हो
जिस औरत से तुम्हारा जन्म होता
उसका ही बलात्कार करते
कसर रह जाती तुम्हारी
जिंदा जला देते, दफना देते
गला घोट देते
यही तुम्हारी मर्दानगी है
कुछ नपुंसको की वजह से
देश पूरी दुनिया में
बदनाम हो रहा
तुम चैन की नींद सो रहे
हाथों में मोबाइल लेकर
सेल्फी खींच रहे
जब मेरा एक बेटा
साहस भरा कदम उठायेगा
देखना उसके पीछे
पूरा भारत आएगा
मिटा दो मेरे बेटो
भारत से बलात्कार का कलंक
जो देखे ,हुए किसी स्त्री को
जिंदा जला दो
हाथ काट दो
फांसी दे दो
न्याय का इंतजार मत करो
तुम्हें मेरे बेटे मेरे बेटे कोई कुछ
नहीं कहेगा
तुम्हारे साथ मेरा हर बेटा
आगे आएगा
उठो मेरे बेटो
तुम्हारे देशकी इज्जत की बारी आई है
मिटा दो मेरे बेटो
भारत से बलात्कार का कलंक
अगर तुम अभी नहीं
खड़े हुए
तो कभी बाप नहीं
बन पाओगे
ना होगा अब बेटियों का जन्म
किस से राखी बंधवाओगे
फिर धीरे-धीरे अब
ये नारा नहीं लगेगा
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
जब नहीं बचेगी बेटियां
तो कहां से आएंगी
फिर बेटियां
उठो ,जागो ,बेटो
अब तुम्हारी देश की
इज्जत की बारी आई है
बॉर्डर पर सैनिक हमारी
रक्षा करते
हम चैन की नींद सोते
उठो बेटो तुम भी
ऐसा काम करो
बहन ,बेटियां घर से जब
बाहर निकले
डर ना हो उनके मन में
ऐसा हम काम करने निकले
उठो, जागो ,बेटो।।
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