Friday, December 6, 2019

चंडीगढ़ से शकुन्तला की रचना- कलियां

नाम - शकुन्तला
राज्य - चंडीगढ़
विषय - कलियां
----------------------------
बहुत उज्ज्वल लगती हैं कलियां
मानो शर्माती, लजाती नववधू हों
ये कलियां-------------
हरी पत्तियां इनको घेरे रहे
मानो उनकी रक्षा करने को
हर समय तैनात खड़े।
खुशबू से चहुँ ओर महकाती
हैं कलियां---------
लाल, पीले, गुलाबी
कई रंगों की छटा बिखराती
हैं कलियां------------- -
सुबह-सुबह ओस की बूंदे
जब कलियों पर पड़ती हैं
ऐसा लगता है चहुँ ओर
जैसे मोती बिखराती हैं।
कितनी स्वच्छ, कितनी सजल
होती हैं ये कलियां
इतनी नाज़ुक, इतनी कोमल
जैसे हों मासूम सी बच्चियां ।
ये बच्चियां भी तो अपने आप में
किसी कलि से कम नहीं
मानो धीरे-धीरे खिल रहीं
अभी पूरी तरह प्रस्फुटित नहीं।
माली जैसे बाग़ीचे में
इन कलियों को प्यार से पालता है
उसी तरह इक बाप भी तो
अपनी कलि( बेटी)को पालता है
प्यार से, दुलार से, दुनिया की
आंधी से संभालता है।
मसल देते हैं दुष्ट जब इन
कलियों को बाग़ीचे में
माली का हृदय तड़प उठता है
जब रौंदा पाता है उन्हें पाव तले।
ऐसे कई हैवान भी हैं
जो कलि सम बच्ची पर वार करे
उसे रौंद दे, औ मसल दे
उसपर अत्याचार करे।
देश के नौजवानों को इक
संदेश देना चाहती हूँ------------
ऐ नौजवानों !!तुम जागो ज़रा
सुनो क्रंदन इन कलियों की
उठो!सुरक्षा का बीड़ा उठाओ
इन कोमल, नाज़ुक मंजरियों की।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...