Tuesday, December 31, 2019

छत्तीसगढ़ से शैलेन्द्र चेलक की रचना- नवा बछर

नाम - शैलेन्द्र चेलक 
पता -पेंडरवानी ,बालोद ,छत्तीसगढ़
विधा - गीत 
शीर्षक - नवा बछर 

      -  नवा बछर -
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नवा बछर के नवा दिन आगे ,
नवा -नवा सब निक -निक लागे ,
करम करैया हँसे - हँसाए ,
ठलहामन सोवत भुलाए ,
दाई- ददा , भाई -बहिनी मन ल ..
नवा - नवा , नवा दिन भा गे , नवा बछर ...
नवा बछर म नवा सुरुज ह ,
नवा जोत बगरावत हवे ,
चिरई -चुरगुन मन , अपन राग म ,
कई किसम के नाचत गावत हवे ,
फेर तै काबर पाछु हवस रे मनखे ..ss..
देख नवा बिहान आगे , नवा बछर . . .
नवा उमंग हे ,नवा तरंग हे ,
आगास म नवा नवा नवरंग हे ,
पाछु मत देख का खोए -पाए ?
कभू हँसे , कभू रोवत भुलाए ,
नवा रद्दा म चले बर संगी ...ss..
नवा परन ले ले आगू आ के , नवा बछर ...
जिनगी भर खुश रही भैया ,
मेहनत लगन ले काम करैया ,
किस्मत के रोना रोही ते पाछु पछताही जी ,
यहू बछर ह पाछु सही ,पंचांग बदलना रही जाही जी ,
तब खूब कमावव ,मजा उड़ावव 
धन समरिध ल पा के , नवा बछर ...
    
       -  शैलेन्द्र चेलक -

5 comments:

  1. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं सर जी

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  2. नवा बछर के बधाई

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  3. बहुत खूब सर जी

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  4. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें सर जी

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