राज्य - झंझारपुर बिहार
शीर्षक - विश्वास भी वो
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विश्वास भी वो
आस भी वो है, विश्वास भी वो
चेहरा भी वो,दर्पण भी वो।
जीवन तो पहले भी था,
अब जीवन का दर्शन भी वो।
बिंदी की खामोशी भी है,
खन करता कंगन भी वो।
आजादी की परिभाषा भी,
जन्म जन्म का बंधन भी वो।
प्रश्नो़ का हल भी है,
जटिल सी उलझन भी वो।
इन्दु कुमारी
झंझारपुर मधुबनी
Jai ho
ReplyDeleteलाजवाब रचना दीदी
ReplyDeleteGood one.
ReplyDeleteBhut sacchi kavita 👌👌
DeleteBahut badhiya
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