राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक - प्याज
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वाह रे प्याज
तेरा नहीं जवाब
जैसा तेवर
वैसा अंदाज
जेब कटी
स्वाद घटी
रुला रुला के
वसूल रहा ब्याज
वाह रे...
कब तलक
और रुलाएगा
बिन प्याज आदमी
सब्जी खाएगा
शादी ब्याह
का मौसम
अब तो हो
जा नरम
और खोल दे
अपना राज
वाह रे .....
किचन से निकल
अखबार टेलीविजन
मैं छाया है
न जाने ये
कैसी अजीब सी
माया है
जनता त्रस्त
मानो हो गया
खुजली खाज
वाह रे...
रोहित कुमार सिन्हा
केशकाल
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