Tuesday, November 26, 2019

छत्तीसगढ़ से शंकर गोयल की रचना- चुनाव

कवि~शंकर गोयल
शीर्षक~चुनाव
राज्य~छत्तीसगढ़
संपर्क~7000484610
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         *चुनाव*
आ गया चुनाव है
मन में भटकाव है ।   
देश में चुनाव है ,.      
बिक रहा गांव है।।      
जन मन का जनहित से ,
हो रहा दुराव है।।    
लालच में डूबे लोगों का,
आपस में हो रहा जुड़ाव हैं।
             आ गया चुनाव है,                             
गांव शहर के विकास की गति
में हो गया ठहराव है।
जनता की भीड़ का , 
किस तरफ झुकाव है
लगाव है, अलगाव है ,   
आ गया चुनाव है।      
नेता हाथ जोड़े नतमस्तक,
घूमे गांव-गांव हैं ।        
मत मतदान पेटी में बंद ,
नेताजी के चेहरे में तनाव हैं।
ऊंट किस करवट बैठेगा
इस पर लग रहा दाँव है ,
आ गया चुनाव हैं ,      
मन में भटकाव हैं
रचनाकार ✍-शंकर गोयल

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